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World News: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले IRGC का 25 पेज का पत्र, ट्रंप की नीतियों पर उठाए सवाल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान की IRGC ने 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी कर ट्रंप प्रशासन की नीतियों, ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सवाल उठाए।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका के मतदाताओं को संबोधित करते हुए 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। चिट्ठी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति पर तीखे सवाल उठाए गए हैं और अमेरिकी नागरिकों से अपने नेताओं तथा उनकी नीतियों पर दोबारा विचार करने की अपील की गई है। यह संदेश ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं।

IRGC की ओर से जारी इस पत्र में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव, परमाणु कार्यक्रम, इजराइल को अमेरिकी समर्थन और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। ईरानी पक्ष ने दावा किया है कि युद्ध के दौरान अमेरिका और इजराइल जिन प्रमुख लक्ष्यों को हासिल करना चाहते थे, वे पूरे नहीं हुए।

ट्रंप की नीतियों को लेकर अमेरिकी जनता से सवाल

IRGC ने अपने संदेश में अमेरिकी मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश की है कि सरकार की विदेश नीति का असर सीधे अमेरिकी नागरिकों पर भी पड़ता है। पत्र में ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि अमेरिकी नागरिकों को अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।

IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने भी अमेरिकी मतदाताओं से ट्रंप की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने अमेरिका की ईरान नीति को लेकर कई आरोप लगाए और कहा कि अमेरिकी जनता को सरकार के फैसलों पर सवाल करना चाहिए।

हालांकि यह पत्र ईरान की सरकारी सैन्य संस्था की ओर से जारी किया गया है और इसमें युद्ध तथा अमेरिकी नीति को लेकर किए गए दावे ईरानी पक्ष के हैं। इन दावों को स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

परमाणु कार्यक्रम पर भी आमने-सामने दोनों देश

अमेरिका की ओर से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना युद्ध के प्रमुख घोषित उद्देश्यों में शामिल बताया गया है। इसके विपरीत ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जुड़ा बताता रहा है।

IRGC की चिट्ठी में भी इसी मुद्दे को उठाया गया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने जिस तरह का खतरा पेश किया, वह वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता।

इस पूरे विवाद में दोनों देशों के दावों के बीच बड़ा अंतर है। अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमता को सुरक्षा के गंभीर मुद्दे के तौर पर देखता है, जबकि तेहरान अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उपयोग के दायरे में बताता है।

‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे पर भी सफाई

IRGC ने चिट्ठी में लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे ‘डेथ टू अमेरिका’ नारे का अर्थ भी अपने तरीके से समझाने की कोशिश की है। पत्र के मुताबिक यह नारा अमेरिकी आम जनता के खिलाफ नहीं बल्कि अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान और उसकी नीतियों के विरोध के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

ईरानी पक्ष ने कहा कि उसका अमेरिकी नागरिकों के साथ दुश्मनी का दावा नहीं है और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व संभव है, बशर्ते अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव हो।

इजराइल के समर्थन और सैन्य हस्तक्षेप पर निशाना

चिट्ठी में अमेरिकी सरकार की इजराइल को दी जा रही सहायता तथा मध्य पूर्व में सैन्य हस्तक्षेप को भी निशाने पर लिया गया है। IRGC ने अमेरिकी जनता से ऐसी नीतियों का विरोध करने की अपील की है, जिन्हें ईरान क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला मानता है।

IRGC का संदेश सीधे अमेरिकी मतदाताओं तक पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है। इससे पहले भी युद्धों के दौरान विरोधी देशों ने अमेरिकी जनता और सैनिकों तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की है। वियतनाम युद्ध के दौर में भी रेडियो प्रसारण के माध्यम से अमेरिकी सैनिकों को सीधे संबोधित किया जाता था।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा दावा

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

IRGC प्रवक्ता मोहेब्बी ने अमेरिकी दावे पर सवाल उठाया कि अमेरिकी सैन्य प्रयासों से होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुल चुका है। उनका कहना है कि कुछ तेल टैंकरों को इस रास्ते से निकाल पाने का मतलब यह नहीं है कि पूरा समुद्री मार्ग सामान्य स्थिति में आ गया है।

दूसरी ओर, उपलब्ध शिपिंग आंकड़ों में इस मार्ग से तेल आवाजाही में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। ऐसे में होर्मुज को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।

मिडटर्म चुनाव क्यों हैं महत्वपूर्ण?

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होने वाले कांग्रेस के चुनाव हैं। इनमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट की सीटों के लिए मतदान होता है।

इन चुनावों के बाद कांग्रेस में सत्ता के संतुलन में बदलाव हो सकता है। राष्ट्रपति की पार्टी के पास दोनों सदनों में पर्याप्त समर्थन न रहने की स्थिति में कानून बनाने और नीतिगत प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए विपक्षी सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

इसी राजनीतिक संदर्भ में IRGC ने अमेरिकी मतदाताओं को संबोधित किया है। पत्र का उद्देश्य अमेरिकी विदेश नीति, युद्ध और मौजूदा नेतृत्व को लेकर मतदाताओं के बीच बहस को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र भाषण का भी जिक्र

IRGC की चिट्ठी में ट्रंप के हालिया बयानों को भी निशाना बनाया गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई और अपनी सैन्य क्षमता को लेकर कड़ा रुख अपनाया था।

ईरानी पक्ष ने ट्रंप की इसी आक्रामक भाषा को आधार बनाकर अमेरिकी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। हालांकि वॉशिंगटन की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अलग दृष्टिकोण रखा गया है।

ईरानी अर्थव्यवस्था पर भी युद्ध का दबाव

एक तरफ IRGC अमेरिकी जनता को युद्ध नीति पर सवाल उठाने का संदेश दे रही है, वहीं ईरान के भीतर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। 29 सितंबर को ईरानी मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 25 लाख रियाल प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे चली गई, जो रिकॉर्ड कमजोर स्तरों में शामिल है।

रियाल की गिरती कीमत का असर आयात लागत और आम लोगों की खरीद क्षमता पर पड़ रहा है। ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही प्रतिबंधों, व्यापारिक बाधाओं, विदेशी मुद्रा की कमी और लंबे समय से जारी आर्थिक दबाव से जूझ रही है। मौजूदा सैन्य टकराव ने इस दबाव को और बढ़ाया है।

अमेरिका-ईरान टकराव में नया राजनीतिक मोर्चा

IRGC की 25 पेज की चिट्ठी सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है। इसने अमेरिका की घरेलू राजनीति को भी अपने संदेश का हिस्सा बनाया है। अमेरिकी मतदाताओं को सीधे संबोधित करके ईरान ने युद्ध, विदेश नीति और नेतृत्व के मुद्दों को चुनावी बहस से जोड़ने की कोशिश की है।

दूसरी तरफ अमेरिकी प्रशासन ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए हुए है। ऐसे में मिडटर्म चुनाव से पहले आया यह पत्र दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष में एक नया राजनीतिक और प्रचारात्मक मोर्चा खोलता है।

अमेरिका में नवंबर के चुनाव के दौरान मतदाता कांग्रेस की संरचना तय करेंगे। उसके बाद अमेरिकी प्रशासन की विदेश नीति और ईरान को लेकर आगे की रणनीति पर भी राजनीतिक परिस्थितियों का असर पड़ सकता है।

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होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के प्रयास जारी

ईरान की ओर से होर्मुज को लेकर अपनी शर्तें रखी गई हैं, जबकि अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दबाव बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच मध्यस्थता के प्रयासों के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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